Friday, August 24, 2012

- - - हालत-ए- इन्सां - - -

ऐ खुदा हालत-ए- इन्सां
 इतनी  अजीब  क्यूँ  है
चिरागों की आड़ में भी 
अँधेरा  पलता  क्यूँ  है 

मानव ही मानवता को
बेघर करता रहता है 
चाँद पैसों में ही इमान
इन्सान का बिकता क्यूँ है 

जो पास है उसका तो
मोल  कुछ भी नही ,
जिसे पा नही सकता 
उसे खोने का डर क्यूँ है 

गुजरे पलों  की  याद में 
तलाशते रहते हैं जिन्दगी 
कीमत-ए -वर्तमान पलों
में  इतनी लघुता  क्यूँ है 

इन्सां हर जगह है पर 
इंसानियत की कमी है 
हर  चेहरे  ने  पहना
   इक  नकाब  क्यूँ  है 

Sunday, June 17, 2012

हमारे नेताओं की जुबानी


इस सरकार  ने बहुत लूट लिया 
अब हमें इक मौका दो ,
इनकी कसर पूरी करने 
हम तैयार बैठे हैं 


अन्ना जी भ्रष्टाचार का 
एक पेड़ तो उखाड़ो  
दस और पेड़ लगाने को 
हम तैयार बैठे हैं     


कासब ,अफजल शरीखों को 
मरो नही ,हमें सोंप दो 
मेहमानी  इनकी करने 
हम तैयार बैठे हैं


देश प्रेम की एक भी  बात 
करके तो देख लो 
टांग अडाने "ठाकरे जी "
तैयार बैठे हैं.


कलमाड़ी जैसे घोटाले ,तुम 
भी तो करके देखो 
देशभक्त बोलने दिग्विजय 
 
तैयार बैठे हैं


घोटाले के क्षेत्र में भी 
नोबल मिलना चाहिए 
अनेकों नोबल भारत लाने 
हम तैयार बैठे हैं


जेब अपनी थोड़ी और 
टाइट कर लो 
मंहगाई को और बढाने      
हम तैयार बैठे हैं.


देशवासियो चिंता न करो 
अपने दिल थम के बैठो 
नए घोटाले का सरप्राइज  देने 
हम तैयार बैठे हैं.

घोटाले का टी - २०


घोटाले की   टी-२० टीम  ने    
अच्छा खेल दिखाया है .
किसी ने  अर्ध शतक मारा है  ,
तो किसी ने शतक लगाया है .

लालू जी तो ओपनिंग में ही 
चौके खूब लगाते हैं .                                                  
उनके आउट होते ,मनमोहन 
वन-डाउन आ जाते हैं .

कलमाड़ी दुसरे छोर पे 
छक्के खूब लगाते हैं 
शुन्य पे आउट मनमोहन जी 
मंहगाई बढ़ा जाते हैं .

फिर आखिकार अन्ना जी 
एक कैच  ले जाते हैं ,
कोंग्रेस वाले धकेल उन्हें 
बाउंड्री बहार ले जाते हैं 

ऐ राजा ने भी यहाँ पे 
खेली अच्छी पारी है 
उनके रिटायर हर्ट होते ही 
येदुरप्पा की बारी है.

सी.बी.आई.की फील्डिंग भी 
कमजोर पड़ जाती है .
रन लेते समय कोंग्रेस  भी 
रास्ते में अड़ जाती है .

दिग्विजय  एक  अम्पायर की 
भूमिका यहाँ निभाते हैं 
कलमाड़ी को नॉट-आउट देकर 
देशभक्त कह जाते हैं .

सोनियां ने भी मैच रेफरी का 
काम खूब संभाला है.
पूरी की पूरी फील्डिंग टीम पे 
जुर्माना लगा डाला है...

Sunday, October 23, 2011

- - - - माँ - - - -

कैसे तुझे  बताऊँ माँ कि
याद तेरी यहाँ आती  है
तेरे प्यार की वो दुनियां अब
आँख मेरी भर जाती  है |

भूखी तू रह जाती है पर
खाना मुझे  खिलाती  है
राह का मेरी मिटाने अँधेरा
तू दीपक बन  जाती  है |

घिर जायें हज़ार दुखों से
जब,राह नजर न आती है
गोद तेरी तो उस पल भी माँ
स्वर्ग  धरा  बन  जाती  है |

दया  भाव  की  तू  मूरत
नित शांत नज़र तू आती है
मेरी तो हर भूल को माँ तू
पल में ही  भूल जाती  है  |

अब बदला मैं हू या वक़्त बदल
गया ,पर तू बदल न पाती है
दुनिया तेरी वो,अब मेरा एक
ख्वाब  बनकर रह जाती  है |

भागदौड़  में  अब  मेरी  ये
जिंदगी  खत्म  हो जाती है
मंजिल ये दूर ले न जाये तुझसे
ये  चिंता  मुझे  सताती  है  |

यूँ तो  सुख हैं  हजारों यहाँ  पे
पर तेरी कमी न पूरी हो पाती है
बिन तेरे, खिली कली  मन की 
मेरी, पल में  मुरझा जाती  है |

कैसे  करू  नमन  तेरा  माँ
कोई  राह  नज़र  न आती है
मूरत  में  भागवान  के  तेरी
सूरत  नज़र  अब  आती  है
सूरत नज़र अब आती है |||||

Saturday, July 16, 2011

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पहाड़ से  गिरे  इन्सां  उठ सकते हैं, मगर
गिर गये जो  नजरों से , उठा  नही करते
कोशिश   हज़ार  कर  ले  बसंत  फिर  भी
सुख गये जो फूल , फिर खिला नही करते
बीते पलों कि याद में यूँ ही गुजर जाती है जिन्दगी
गुजर गये जो पल,वापस  मिला नही करते
यूँ तो टूट जाया करते हैं  बंधन पल भर में,
बिना गांठ पड़े मगर,फिर से जुडा नही करते
धुल जाते  हैं कपड़ों पे लगे धब्बे  आसानी से
चरित्र पे लगे  दाग  मगर, धुला  नही  करते

दूर से कितनी भी हसीन नजर आये दुनिया मगर
हैं सबसे खुबसुरत जो , किसी को मिला नही करते

Saturday, March 12, 2011

----- हमारे देश में महिलाओं की स्थिति ------

 आजकल दिल्ली  में लडकियों की हत्या  एक आम बात बन गयी है |
वाह !! हमारे देश की राजधानी कहे जाने वाले शहर दिल्ली |
आज हमारे देश में लडकी सर उठा के नही चल सकती है 
शायद अब हमारे देश में महिलाओं  को यह अधिकार ही नही रहा है |
वाह हमारे देश के कानून और हमारे देश की सुरक्षा  व्यव्व्स्था \
हमारे देश में अफजल और कासब जैसे लोगो को तो जीने का पूरा अधिकार है 
उनके लिए पूरी सुरक्षा भी उपलब्ध है पर हमारे देश में महिलाओं की स्थिति 
तो देखने ही लायक है |
पिछले कुछ दिनों से अख़बारों में पढने को बहुत मिला ------
आरुशी मर्डर केश ,,,,,
राधिका तंवर, बी.ए. दूसरे वर्ष की छात्रा की , Ramlal आनंद कॉलेज के बाहर हत्या कर दी गई |
एक जवान लड़की  की दिनदहाड़े कॉलेज में हत्या |
 एक बुजुर्ग महिला की उसके घर में गला रेतकर  हत्या कर दी गई,
  एक गृहिणी रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाई गयी | 
 दक्षिण पश्चिम दिल्ली में एक किशोर लड़की की हत्या |
इन सब बातों का शायद उन लोगों पर अशर न पड़े जो आराम से कुर्शी पर बैठे हैं या जो 
सुरक्षा के झूठे दावे देते हैं पर उन लोगों पर जरुर असर पड़ता है जिनके जिगर का टुकड़ा उनसे
छिन जाता है या जिनके परिवार का सदस्य उनसे हमेशा हमेशा के लिए अलग हो जाये |

अभी तक मुझे नही लगता की कोई एसा सख्त कदम उठाया गया है जिससे ऐसे घिनोने 
कर्म करने वाले पापियों को ऐसी सजा मिल सके ताकि कोई फिर ऐसा कर्म करने की भी 
न सोचे |
खैर हमारे देश का कानून इतनी जल्दी किसी बात की खबर नही लेता है |यही हमारा 
देश है जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है |

Wednesday, February 9, 2011

A REAL STORY

एक समय की बात है एक दंपत्ति ने बड़ी उम्मीद से अपने आंगन में यह सोचकर  एक पेड़ लगाया था कि कभी बड़ा होकर वह पेड़ उनके आंगन को हरा-भरा बनाएगा |पेड़ जब छोटा था तो अती सुन्दर लगता था |
उसमे प्यारी प्यारी कोंपलें खिली  थीं देखने में वेचारा प्रतीत होता था |उन लोगों ने उसमे कई साल तक खाद बीज और पानी दिया |पेड़ भी दिन दूनी रात चौगुनी दर से बढ़ने लगा

खैर यह क्रम ज्यादा नही चल सका एक मुश्किल घड़ी के समय  दम्पत्ति को ही उस पेड़ कि हरी -भरी डालियों पर कुल्हाड़ी चलानी पड़ी ,और इस प्रकार उस पेड़ को के ठूंठ में बदल दिया गया | काटते समय  कई बार उसने तडफडाकर यह व्यक्त भी करना चाह कि उसे न कटा जाये लेकिन सब व्यर्थ था |फिर  पेड़ यह सब शंतोचित्त भाव से देखता हुआ,अपनी भावनाओं पर अंकुश लगाते हुए सब कुछ  सहन करता रहा

     खैर बेचारा पेड़  करता भी क्या ,कुछ दिन तक ज्यों का त्यों ठूंठ बनकर खड़ा रहा |लेकिन  अब भी उस आंगन को बनाने के इरादे उसके मन में प्रवलता से बने हुए थे |
कुछ समय बीता ,एक दिन फिर से उस ठूंठ में नयी कोपलें खिलने लगीं |तने क़ी मुख्या शाखा जो कटी गयी थी उसकी साइड से एक नयी शाखा निकली जो पहली शाखा से भो ज्यादा सुन्दर लगती थी |इस बार मालिक ने उसे बढने क़ी इजाजत दे दी और वह शाखा नये पेड़ क़ी भांति दिन दूनी रात चौगुनी दर से बढने लगी |इस दौरान कई बार आंधियां चलीं ,बिजली गिरी ,तेज बारिश हुई ,तूफ़ान आया ,पतझड़ आया लेकिन वह डाली इस बार अपने आप को एक विशाल और मजबूत पेड़ क़ी भांति स्थापित करने में सफल रही |अब उस पेड़ क़ी जड़ें उस आँगन में इस कदर फ़ैल गयीं कि अब वह चाहकर भी उस आँगन से अलग नही हो सकता था |
आखिर एक दिन बसंत आया, वे दंपत्ति उस पेड़ कि छाँव में बैठकर उन पुराने दिनों को याद कर रहे थे |पेड़ भी उनको  देखकर मन ही मन काफी खुश हो रहा था |अब मालिक उस पेड़ को उतना ही प्यार देता जितने
प्यार से उसने उसे लगया ,सींच कर बड़ा किया था |और एक बार फिर से वह दंपत्ति उसी पेड़ से अपने आंगन के हरा भरा होने कि उम्मीद लगाये बैठा है |'----------------

Tuesday, February 8, 2011

ऐ खुदा

ऐ खुदा   इस  जहाँ   में   तेरे ,
            कोई  हँसता ,कोई   रोता   क्यों ,,

इन्सान -इन्सान  सब  एक  समान  हैं  तो  फिर
            उंच -नीच   जाति-भेद  क्यों

इन्सान  तो  सब  तेरी  ही  सन्तान  हैं  फिर ,
            कोई  वारिस  कोई  लावारिस  क्यों ,,

तुने  ये  पेट  तो  सबको  दिया  हैं  फिर ,
            किसी  को  खाना  कोई  भूखा  क्यों ,,

दुनिया  में  कुछ  तेरा -मेरा  नही  फिर
            कोई  धनी कोई  गरीब  क्यों ,,

इन्सान  तो   हर  जगह  पर  है  फिर  ,
            इंसानियत   की   कमी   क्यों  ??